विपति जब भी आती हैं ,
अकेले नहीं आती ,
पुरे लाव -लश्कर के साथ आती हैं ,
ग्रह -नक्षत्र बिगड़ जाते हैं ,
और मित्र बदल जाते हैं ,
नजरिया बदल जाता हैं ,
आधा भरा गिलास ,आधा खाली हो जाता हैं ,
जिस रश्मि से आप पथ पाते थे ,
उसी से अब आँख चैधिया जाता हैं ,
जो पत्थर आपका सहारा था ,
वो सड़क का रोड़ा बन जाता हैं ,
विपति जब भी आती हैं ,
अकेले नहीं आती ,
पुरे लाव -लश्कर के साथ आती हैं.
Copyright@@ sankalp mishra
अकेले नहीं आती ,
पुरे लाव -लश्कर के साथ आती हैं ,
ग्रह -नक्षत्र बिगड़ जाते हैं ,
और मित्र बदल जाते हैं ,
नजरिया बदल जाता हैं ,
आधा भरा गिलास ,आधा खाली हो जाता हैं ,
जिस रश्मि से आप पथ पाते थे ,
उसी से अब आँख चैधिया जाता हैं ,
जो पत्थर आपका सहारा था ,
वो सड़क का रोड़ा बन जाता हैं ,
विपति जब भी आती हैं ,
अकेले नहीं आती ,
पुरे लाव -लश्कर के साथ आती हैं.
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