Tuesday, September 22, 2015

उस मरुभूमि का नाम बिहार हैं

जहाँ मानव की पहचान जाति हैं ,
जहाँ विवेक पर भरी लाठी हैं ,
जहाँ की जनता परदेश की रोटी खाती हैं ,
जहाँ जवानी परदेश में बीतती हैं ,
उस मरुभूमि का नाम बिहार हैं। 
जहाँ हर घर में नेता हैं ,
जहाँ हर घर में बुद्धिजीवी हैं ,
जहाँ चर्चा राष्ट्र से कम पर होती नहीं ,
जहाँ हर इंसान अंदर से रोता हैं ,
उस मरुभूमि का नाम बिहार हैं।
जहाँ घनानंदो का शासन हैं ,
जहाँ चाणक्य भटक कर आ जाते हैं ,
जहाँ बुद्ध -महावीर जन्म पाते हैं ,
जहाँ आज भी शांति का इन्तजार हैं ,
उस मरुभूमि का नाम बिहार हैं।
जहाँ सत्ता बदलती हैं ,जीवन -स्तर नहीं बदलता ,
जहाँ आज़ादी मिलती हैं ,गुलामी नहीं छूटता ,
जहाँ वादा तो रोज होता हैं ,अमल नहीं होता ,
जहाँ चुनाव तो होता हैं,सरकार नहीं बनता ,
उस मरुभूमि का नाम बिहार हैं। 

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