Thursday, April 3, 2014

सब मुझसे रूठ गए ,तुम तो मुझसे मत रूठो।

बादल ,बिज़ली ,बारिश ,झरने ,सागर
सब मुझसे रूठ गए ,तुम तो मुझसे मत रूठो।
सड़क ,गाडी मंज़िल ,प्रतिबद्धता,प्रेरणा
सब मुझसे रूठ गए ,तुम तो मुझसे मत रूठो।
पापा ,काका ,मामा ,सगे -सम्बधी सारे
सब मुझसे रूठ गए ,तुम तो मुझसे मत रूठो।
सुबह ,दोपहर ,शाम ,दिन ,रात
सब मुझसे रूठ गए ,तुम तो मुझसे मत रूठो।
नींद -चैन ,सुख-दुःख,संस्कार ,सम्मान
सब मुझसे रूठ गए ,तुम तो मुझसे मत रूठो।  

Wednesday, March 26, 2014

मै हूँ की मुखौटा हूँ

मै हूँ की मुखौटा हूँ ,
कालकोठरी में हूँ ,
दृष्टिगोचर चौतरफा हूँ ,
समय के साथ वृक्ष बना हूँ ,
या की मैं पौधा हूँ ,
मै हूँ की मुखौटा हूँ।