Saturday, May 30, 2015

ये महलों, ये तख्तों, ये ताजों की दुनिया
ये इंसान के दुश्मन समाजों की दुनिया
ये दौलत के भूखे रवाजों की दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है

हर एक जिस्म घायल, हर एक रूह प्यासी
निगाहो में उलझन, दिलों में उदासी
ये दुनिया है या आलम-ए-बदहवासी
ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है

जहाँ एक खिलौना है, इंसान की हस्ती
ये बस्ती है मुर्दा परस्तों की बस्ती
यहाँ पर तो जीवन से मौत सस्ती 
ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है

जवानी भटकती है बदकार बन कर
जवां जिस्म सजते हैं बाजार बनकर
यहाँ प्यार होता है व्योपार बनकर
ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है

ये दुनिया जहाँ आदमी कुछ नहीं है
वफ़ा कुछ नहीं, दोस्ती कुछ नहीं है
यहाँ प्यार की कद्र ही कुछ नहीं है
ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है

जला दो इसे, फूँक डालो ये दुनिया
मेरे सामने से हटा लो ये दुनिया
तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है
गीतकार : साहिर लुधियानवी, गायक : मोहम्मद रफी, संगीतकार : सचिनदेव बर्मन, 
चित्रपट : प्यासा (१९५७) / Lyricist : Saahir Ludhiyanvi, Singer : 
Mohammad Rafi, Music Director : Sachindev Burman, Movie :  

Monday, March 9, 2015

मौत मेरी संगनी ,मौत मेरी प्रेमिका

मौत मेरी संगनी ,मौत मेरी प्रेमिका
मौत के आगोश में पुलकित मेरी कविता।
मौत मेरी आशा ,मौत मेरा वादा ,
मौत के आस्था में डूबी मेरी तूलिका।
मौत मेरा एतबार ,मौत मेरा इन्तजार ,
मौत के मधुरस से पोषित मेरी रीतिका।
मौत मेरा विश्वास ,मौत मेरा धौर्य ,
मौत के पराक्रम से आलोकित मेरी कृतिका।
मौत मेरा शौर्य ,मौत मेरा सौंदर्य ,
मौत के बोझ तलें दबी मेरी सफलता।
मौत मेरा भाग्य ,मौत मेरा आलस्य ,
मौत के पहले मर चुकी महत्वकांझा।
मौत मेरी पूजा ,मौत मेरी पवित्ररता ,
मौत के आगे नतमष्तक पौरुष देवता।

Thursday, December 18, 2014

मैच -फ़िक्सर देखो बन बैठा क्रिकेट कप्तान

समरथ के ना दोष गोसाई चाहे करो कोई काम ,
मैच -फ़िक्सर देखो बन बैठा क्रिकेट कप्तान।
सीना ठोक के कह रहे जो कर सके वो कर ,
हम तो दिन -दहाड़े लूटेंगे तेरे भावना और सम्मान।

Monday, June 30, 2014

बिहार में फेर आईल जंगल -राज

बिहार में फेर आईल जंगल -राज ,
लोगवा के जिंदगी भइल बेहाल ,
बिहार में फेर आईल जंगल -राज ,
बिजली -सड़क नइखे कौनो रोज़गार ,
जेने देखि जाति -धरम के बवाल ,
बिहार में फेर आईल जंगल -राज।
सपना बेचता ,लूटा जाता घर -दुआर ,
थाना भइल बा चोरन के दरबार ,
दलाल चालवंत बाड़े बिहार सरकार ,
बिहार में फेर आईल जंगल -राज ,
लोगवा के जिंदगी भइल बेहाल।

Sunday, June 1, 2014

जिंदगी के दौड़ में मैदान में खड़े रह

जिंदगी के दौड़ में मैदान में खड़े रह ,
जीत हो हार हो फ़ैसले पर अड़े रह ,
वक़्त के साथ पत्थर भी घिस जाता हैं ,
दिव्य संतान बस तुम युद्ध में भिड़े  रह।
हौसले जीत की नींव बन जाती हैं ,
गर्म ख़ून ही तलवार उठाती हैं ,
शौर्य -धौर्य एक साथ मिशाल बन जाती हैं ,
आलस त्याग रण -भूमि में कूद पड़ ,
जिंदगी के दौड़ में मैदान में खड़े रह ,
जीत हो हार हो फ़ैसले पर अड़े रह.

Thursday, April 3, 2014

सब मुझसे रूठ गए ,तुम तो मुझसे मत रूठो।

बादल ,बिज़ली ,बारिश ,झरने ,सागर
सब मुझसे रूठ गए ,तुम तो मुझसे मत रूठो।
सड़क ,गाडी मंज़िल ,प्रतिबद्धता,प्रेरणा
सब मुझसे रूठ गए ,तुम तो मुझसे मत रूठो।
पापा ,काका ,मामा ,सगे -सम्बधी सारे
सब मुझसे रूठ गए ,तुम तो मुझसे मत रूठो।
सुबह ,दोपहर ,शाम ,दिन ,रात
सब मुझसे रूठ गए ,तुम तो मुझसे मत रूठो।
नींद -चैन ,सुख-दुःख,संस्कार ,सम्मान
सब मुझसे रूठ गए ,तुम तो मुझसे मत रूठो।  

Wednesday, March 26, 2014

मै हूँ की मुखौटा हूँ

मै हूँ की मुखौटा हूँ ,
कालकोठरी में हूँ ,
दृष्टिगोचर चौतरफा हूँ ,
समय के साथ वृक्ष बना हूँ ,
या की मैं पौधा हूँ ,
मै हूँ की मुखौटा हूँ।